Harivansh Rai Bachchan

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"नाम अगर कोई पूछे तो, कहना बस पीनेवाला
काम धालाना, और धालाना सब्को मदिरा क प्याला
जाति प्रीये, जाति प्रीये पूछे यदि कोई,
कह देना दीवानों की
धर्म बताना प्यालों की ले माला जपना मधुशाला"
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"नीड़ का निर्माण फिर फिर
नेह का आह्वान फिर फिर
वो उठी आंधी की नभ में
छा गया सहसा अँधेरा
धुली धूसरित बादलों ने
भूमि को इस भाँति घेरा
रात सा दिन हो गया फिर
रात आई और काली
लग रहा था अब न होगा
इस निशा का फिर सवेरा...
रात के उत्पात भय से
भीत जन जन
भीत कण कण
किन्तु प्राची से उषा की
मोहिनी मुस्कान फिर फिर
नीड़ का निर्माण फिर फिर
नेह का आह्वान फिर फिर"

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